Wednesday, January 30, 2013

आँसूओंकी बारिशें 

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ऊँचे ऊँचे पर्वतोंपे प्राणवायु की कमी
सागरोंकी गहराईयोंमें आँसूओंकी ही नमी
ढूंढता हूँ सपने अपने टूटी-फूटी ख्वाइशोंमें
भीगी भीगी जिंदगानी आँसूओंकी बारिशोंमें

सूर्यको है ग्रहण लगा, घनघोर अँधेरा छा गया
अँधेरी इस भूल-भुलैयामें क्या कोई रास्ता है नया?
खोजता हूँ मकसद मेरा अधुरीसी इन फर्माइशोंमें
भीगी भीगी जिंदगानी आँसूओंकी बारिशोंमें

बहार है पर कोयल नहीं कैसे बजे शहनाईयाँ?
पत्ते झड गए, फूल मुरझे — पेडोंकी तन्हाईयाँ
थक गया हूँ अब अकेला जिंदगीकी आजमाइशोंसे
भीगी भीगी जिंदगानी आँसूओंकी बारिशोंमें

चाहता हूँ ऐसा इक कल जब नसीब न हो मगरूर
चाहता हूँ एक ही पल इन दूखोंसे दूर दूर
भगवान भी तंग आ गया मेरी इन्ही गुज़ारिशोंसे
भीगी भीगी जिंदगानी आँसूओंकी बारिशोंमें

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