वो बचपन!

हेमा-रेखा-जया संग डोलें,
शक्तिमान से सॉरी बोलें,
वो बचपन!

टूटीं खिड़कियाँ, चौके-छक्के,
माँ की मदद से वादे पक्के,
वो बचपन!

सपनों मे जलेबी आती थी,
टॉफ़ी मे खुशियाँ गाती थी,
वो बचपन!

जब हाँथ लबों संग आम चखें,
कुल्फ़ीवाले की राह तकें,
वो बचपन!

कूदा-फांदी, कीचड़, मस्ती,
डूबे ना कागज़ की कश्ती,
वो बचपन!

नहीं थी ताकद ‘कट्टी’ में,
दोबारा दोस्ती छुट्टी में!
वो बचपन!

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